गोकुलपुरा के गणगौर मेले में दिखी प्राचीन परंपरा, झिलमिला उठी हर गली, मोहल्ला

आगरा, 31 मार्च। पारिवारिक सौहार्द, प्रेम और आस्था का पर्व जब सामूहिक रूप लेता है तो वो महापर्व कहलाता है। इसी महापर्व का सदियों से साक्षी बनता आ रहा है गोकुलपुरा क्षेत्र। सोमवार चैत्र नवरात्र की तृतीया से दो दिवसीय गणगौर मेला का शुभारंभ पारंपरिक रीतियों और उत्साह के साथ हुआ।  
गणगौर मेला में प्राचीन परंपरा की झलक दिखाई दी। गणगौर के तीन दर्जन से अधिक जोड़े सजाए गये हैं, जिनकी रात में शोभायात्राएं निकाली गईं। पूरा क्षेत्र विद्युत झालरों से झिलमिला उठा है। उत्तर भारत के इस ऐतिहासिक गणगौर मेले की तैयारियां कई दिन से चल रही थीं। जो सोमवार की शाम तक चलीं। सोमवार की रात को इस मेले का शुभारंभ विधानसभा सदस्य विजय शिवहरे, भाजपा जिला अध्यक्ष प्रशांत पौनिया, मुख्य संरक्षक पं. दिनेश चंद्र शर्मा, पं. दाउदयाल शर्मा, संरक्षक रजत अस्थाना और केके शिवहरे ने दीप जला कर किया। जिनका स्वागत श्री गणगौर मेला कमेटी के अध्यक्ष रामकुमार कसेरा, महामंत्री मनीष वर्मा, कोषाध्यक्ष सुनील वर्मा ने किया। अध्यक्ष रामकुमार कसेरा ने बताया कि अशोक नगर, गोकुलपुरा, राजामंडी, कंसगेट, बल्का बस्ती, मंसा देवी आदि मेला क्षेत्र में लगभग 250 स्टाल लगे हुए हैं। क्षेत्र की हर गली में गणगौर के जोड़ें विराजित किये गए हैं। कुल 32 ईसर और गौरा के जोड़ों को शोभायात्रा के माध्यम से ढोल नगाड़ों के साथ हटकेश्वर मंदिर पर जल ग्रहण के लिए ले जाया गया। जहां भजन संध्या सहित सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये गए। मिताई गौर मंडल के गायकों ने अपनी स्वरलहरियों से मेले के माहौल को भक्तिमय कर दिया। 
गणगौर मेले का ऐतिहासिक महत्व
गणगौर मेले का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व गहरा है। यह मेला विशेष रूप से महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण होता है। गणगौर त्योहार शिव और पार्वती के पुनर्मिलन और देवी पार्वती की सौभाग्य की कामना से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि मां पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी इस भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें वरदान दिया और तभी से यह पर्व सौभाग्य और सुख-समृद्धि का प्रतीक बन गया।
सदियों पुरानी है भस्मासुर दहन परंपरा
गणगौर मेले में होने वाले भस्मासुर दहन की लगभग तीन सदियों पुरानी परंपरा है। श्री गणगौर मेला कमेटी के मुख्य संरक्षक पंडित दिनेश चंद्र शर्मा ने बताया कि एक अप्रैल को प्रात: चार बजे धनकामेश्वर मंदिर, सिंधी कालोनी, गोकुलपुरा पुलिस चौकी के पास भस्मासुर के 15 फुट ऊंचे पुतले का दहन होगा। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेंगे। उन्होंने बताया कि भस्मासुर दहन का यह अनोखा आयोजन पौराणिक कथा पर आधारित है। भस्मासुर को भगवान शिव ने वरदान दिया था कि वह जिसके सिर पर हाथ रखेगा, वह भस्म हो जाएगा। भस्मासुर द्वारा शक्ति का दुरुपयोग किया जाने लगा। इसे रोकने के लिए भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर उसे नष्ट कर दिया। इसी के प्रतीकात्मक स्वरूप मेले में भस्मासुर का पुतला दहन किया जाएगा।
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