जीवन सुंदर तब बनता है जब सुख के साथ शांति भी हो

आगरा, 26 फरवरी। जीवन में अवसर दो बार नहीं मिलते, जो अवसर मिले उसको गंवा न देना। हनुमान जी को एक अवसर मिला प्रभु सेवा का, उसका परिणाम हैं आज हम हनुमान जी की कथा कह-सुन रहे हैं। सुंदर काण्ड हनुमान जी की सफलता का कांड है, जब वह लंका के लिए उड़े, डरपोक और भगोड़े राजा सुग्रीव के मंत्री भर थे, लेकिन जब लंका जलाकर श्री राम जी के पास लौटे, तो विराट स्वरूप में थे। यह व्याख्यान दे रहे थे श्री हनुमत त्रिवेणी कथा के दूसरे दिन खंदारी में आरबीएस कॉलेज के राव कृष्ण पाल सिंह सभागार में पूज्य संत पं. विजय शंकर मेहता। 
श्री हरि सत्संग समिति द्वारा आयोजित इस कथा में उन्होंने कहाकि आप भरोसे से कथा सुनिए, भरोसे का दूसरा नाम है भगवान। हरेक के जीवन में कुछ न कुछ चल रहा है, आज ही संकल्प लें, उचित को जीवन में स्थान देना है, अनुचित को निकाल बाहर फैंकना है। उन्होंने कहा कि जीवन सुंदर तब बनता है जब सुख के साथ शांति भी हो।
उन्होंने बुजुर्गों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, राम जी ने भी अपनी सेना में सबसे बूढ़े यानि जामवंत को ही सबसे ज्यादा महत्व दिया और उनसे मार्गदर्शन लेकर युद्ध जीता था। आप भी याद रखें जब भी कोई बड़ा काम करने जाएं तो घर के बड़े बूढ़े को सबसे पहले साथ लेकर चलें, सफलता कदम चूमेगी आपके। 
कथा में  श्री हरि सत्संग समिति के अध्यक्ष शांति स्वरूप गोयल, सुनील अग्रवाल, रामलीला कमेटी के महामंत्री राजीव अग्रवाल, प्रवीण सिंघल, अभिनय अग्रवाल, संजय गोयल, संजय मित्तल, राहुल हुंडी, उमेश बंसल, भगवान दास, विष्णु दयाल बंसल, उमेश कंसल आदि उपस्थित थे।
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