Agra News: खबरें आगरा की...

आगरा कॉलेज में हुआ मिशन शक्ति कार्यक्रम
आगरा, 29 अक्टूबर। आगरा कॉलेज में मंगलवार को आयोजित 'मिशन शक्ति' कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्राचार्य प्रो आरके श्रीवास्तव ने कहा कि कॉलेज में महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षण और जागरूकता के लिए 'मिशन शक्ति' कार्यक्रम का आयोजन एक महत्वपूर्ण पहल है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और उन्हें मजबूत बनाना है ताकि वे समाज में सुरक्षित और आत्मनिर्भर रहें।
विधि विशेषज्ञ डा निधि शर्मा ने "विशाखा गाइडलाइन" के ऊपर बोलते हुए कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न एवं उससे संबंधित विधिक नियमों की छात्राओं को जानकारी दी। कार्यक्रम संयोजक प्रो रचना सिंह ने महिलाओं के अधिकार और उनके सिद्धांतों पर विचार प्रस्तुत किये। 
प्रो अंशु चौहान ने महिलाओं के संरक्षण, कानूनी सहायता और उनकी आत्मरक्षा के बारे में चर्चा की। कार्यक्रम के दौरान प्रो कल्पना चतुर्वेदी, प्रो आशीष कुमार,‌ डा चंद्रवीर सिंह, नितेश शर्मा उपस्थित रहे।
धन्यवाद ज्ञापन प्रो अमित अग्रवाल ने किया।
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बसों में यात्रियों बहका कर सामान लूटने वाले तीन दबोचे
आगरा, 29 अक्टूबर। थाना हरि पर्वत पुलिस ने मेरठ के रहने वाले तीन शातिर टप्पेबाज़ों को गिरफ्तार किया है। इनसे लोगों को बहका कर लूटा गया माल भी बरामद किया गया।
एसीपी हरिपर्वत आदित्य कुमार ने बताया कि तीनों शातिर बसों में यात्रा करने वाले लोगों को अपना निशाना बनाते थे। इन शातिरों ने विगत सितम्बर माह में कासगंज जा रहे एक पीड़ित के साथ आईएसबीटी पर टप्पेबाजी कर उसका कीमती सामान से भरा बैग पार कर दिया था। उसमें पीड़ित के आभूषण तथा ज़रूरी सामान रखा हुआ था। तभी से पुलिस इनकी तलाश में जुटी थी।
एसीपी ने बताया कि पुलिस ने पकड़े गए टप्पेबाज़ों के पास से ज्वैलरी, 55 हजार की नकदी सहित अन्य समान बरामद किया है। उन्होंने बताया कि डीसीपी सिटी ने शातिरों को गिरफ्तार करने वाली टीम को 15,000 रुपये पुरस्कार स्वरूप दिए हैं। इन शातिरों के तार अन्य राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं। पुलिस इस खोज में जुटी हुई है। _________________________________
ससुराल पहुंचे दामाद की पिटाई
आगरा, 29 अक्टूबर। जिले में पत्नी से झगड़े के बाद ससुराल पहुंचे एक दामाद की पिटाई कर दी गई। पत्नी ने भी अपने घरवालों का विरोध नहीं किया। ससुराल वालों ने जान से मारने की धमकी दी है। पीड़ित की शिकायत के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया। 
मामला बाह क्षेत्र के किंदरपुरा गांव का है। यहां के रहने वाले नरोत्तम ने अपनी बेटी प्रियंका की शादी दो साल पहले बासौनी के बड़ोस गांव के रहने वाले उदय सिंह के साथ की थी। उनके एक साल का बेटा भी है। दामाद उदय सिंह ने बताया कि पत्नी से झगड़ा हो गया था। वो बेटे को लेकर मायके चली आई थी। वह पत्नी को घर वापस लाने के लिए छह अक्तूबर की रात को ससुराल आया था। यहां पर ससुर नरोत्तम और सास उषा से बात की गई, तो वे दोनों भड़क गए। सास और ससुर ने उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। उसने खुद को बचाने का प्रयास किया, तो पत्नी के भाई अर्जुन, प्रदीप और बैजनाथ ने भी उस पर हाथ छोड़ दिया। ससुराल वाले उसे पीटते रहे और पत्नी देखती रही। इसके बाद जान से मारने की धमकी देकर उसे वहां से भगा दिया। 
पुलिस ने बताया कि इस घटना से एक दिन पांच अक्तूबर को प्रियंका ने दो लाख रुपये और कार के लिए उत्पीड़न व मारपीट करने का मुकदमा ससुराल वालों के खिलाफ दर्ज कराया था। इस मामले में पुलिस ने पति उदय सिंह, ससुर मायाराम, सास विमला देवी, जेठ जयसिंह, जेठानी सरोज और छह अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया था।
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तीन घंटे थाने में बैठे फिर भी नहीं लिखा गया पूर्व जिला जज का मुकदमा!
आगरा, 29 अक्टूबर। एक पूर्व जिला जज अपनी प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए तीन घंटे तक थाने में बैठे रहे, मगर उनकी शिकायत दर्ज नहीं हुई। आखिरकार उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा। थाने के मुंशी ने कह दिया कि इंस्पेक्टर साहब 12 बजे के बाद आते हैं, उनके आने के बाद ही मुकदमा दर्ज होगा।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सरला बाग में रहने वाले सुभाष कुलश्रेष्ठ हाल ही में जिला जज के पद से सेवानिवृत हुए हैं। मंगलवार सुबह 3:30 बजे दयालबाग अपने खेतों में सेवा करने के लिए कार से जा रहे थे। राधा नगर के पास एक कार चालक काफी तेज गति में आया और पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। गाड़ी बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई। हादसे में वह भी बाल-बाल बचे। आरोप है कि गाड़ी चालक शराब के नशे में धुत था। सेवानिवृत्त जिला जज और भीड़ उसे पकड़कर थाने ले गई। सेवानिवृत्त जिला जज ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए तहरीर दी। आरोप है कि मुंशी ने कहा, अभी मुकदमा दर्ज नहीं हो पाएगा। इंस्पेक्टर साहब 12 बजे के बाद आते हैं। तभी थाने में आना। पीड़ित ने कहा कि यह कौन सा तरीका है कि इंस्पेक्टर साहब के आने के बाद ही मुकदमा दर्ज होगा।
पीड़ित सेवानिवृत्त जिला जज मुकदमा दर्ज कराने के लिए तीन घंटे थाने में बैठे रहे। कोई सुनवाई नहीं होने और पुलिस का दुर्व्यवहार देखते हुए वह वहां से दुखी होकर चले गए।
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