सिया रामचंद्रजी के संग पड़न लागी भांवरियां
आगरा, 29 सितंबर। सोलह श्रंगार कर दुल्हन सी सजी थी सीता स्वरूपा तुलसी जी। लाल चुनरी ओढो तुलसी माता और श्रीराम स्वरूप दूल्हा बने सालिगराम। सतरंगी फूलों से सजे जनमाने से एक तरफ सिर पर पगड़ी सजाए बाराती और दूसरी तरफ थे घराती। वैदिक मंत्रोच्चारण व विधि विधान के साथ जनकपुरी में आज तुलसी सालिगराम का विवाह सम्पन्न हुआ।
श्रीकृष्ण गौशाला में सजे जनमासे में पिता जनक व माता सुनयया (प्रमोद वर्मा, मंजू वर्मा) ढोल नगाड़ों संग तुलसी जी दुल्हन रूप में सजाकर धूमधाम से पहुंचे।
तुलसी-सालिगराम विवाह को पूरे विधान के साथ सम्पन्न कराया गया। सर्वप्रथम पंचदेवों के साथ मां तुलसी व भगवान विष्णु का पूजन किया गया। इसके उपरान्त विधि विधान से विवाह की सभी रीति रिवाज के साथ तुलसी सालिगराम का विवाह सम्पन्न हुआ। फेरों के समय मिथिला की सखियों ने खूब बधाईयां व विवाह के मंगल गीत गाए।
राजा जनक व रानी सुनयना संग श्रीजनकपुरी महोत्सव आयोजन समिति के पदाधिकारियों व सदस्यों ने भी बढ़-चढ़ कर कन्यादान लिया। स्वर्ण, परिधान, बर्तन सहित कई उपहार भेंट किए। विवाह एकादश ब्राह्मणों द्वारा (पूजा प्रभारी आचार्य राहुल रावत, डॉ. देवस्वरूप शास्त्री, पं. राजेश शर्मा, पं. अकुर दत्त गौड़, पं. कपिल शर्मा, पं.कुणाल शर्मा, पं. विजय उपाध्या, पं. बृजगोपाल तिवारी व 11 बटुक ब्राह्मणों) सम्पन्न हुआ। राम लीला कमेटी के पुरोहित डा वेदप्रकाश प्रचेता ने विवाह संपन्न कराया।
इस दौरान प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय उनकी पत्नी प्रीति उपाध्याय, राजा दशरथ संतोष शर्मा उनकी पत्नी ललिता शर्मा श्रीकृष्ण गौशाला समिति के अध्यक्ष गिरधारी लाल भगत्यानी, उनकी पत्नी और जनकपुरी समिति के सभी प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहे।
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