लक्ष्य से दो घंटे दूर, लेकिन पिछले सालों की अपेक्षा बहुत जल्दी निकली राम बरात
आगरा, 28 सितंबर। उत्तर भारत की सर्वश्रेष्ठ राम बरात शनिवार की दोपहर दो बजे शुरू कर दी गई। हालांकि राम के स्वरूप को रथ पर विराजमान होने में दो घंटे की देरी हुई, लेकिन फिर भी रामलीला कमेटी के सभी पदाधिकारी उत्साहित थे कि हर साल होने वाली देती पर काफी हद तक काबू पा लिया गया।
राम के स्वरूप बरात के सबसे आखिरी रथ पर विराजमान होते हैं और उन्हें सायं छह बजे तक रथ पर विराजमान कराने का लक्ष्य था। इसमें दो घंटे की देरी हुई। रात आठ बजे उन्हें रथ पर विराजमान कराया गया। इसके बाद बरात ने गति पकड़ ली। रात साढ़े ग्यारह बजे तक रामजी का रथ बेलनगंज पहुंच चुका था।
रावतपाड़ा तिराहे से शुरू हुई यह राम बरात रावतपाड़ा, दरेसी, छत्ता बाजार, कचहरी घाट, बेलनगंज, धूलियागंज, घटिया आजम खां, छिली ईंट रोड, फुलट्टी, किनारी बाजार होते हुए वापस रावतपाड़ा पहुंचेगी और यहां क्षणिक विश्राम के बाद स्वरूपों को कारों में बैठाकर जनकपुरी ले जाया जाएगा।
राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के स्वरूपों को रथों पर विराजमान कराने से पहले मनःकामेश्वर मंदिर के निकट स्थित बारहद्वारी पर केंद्रीय मंत्री प्रो एसपी सिंह बघेल, प्रदेश सरकार के मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, विधायक बाबूलाल, जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी और पुलिस कमिश्नर जे रविंद्र गौड़ समेत अनेक लोगों ने उनकी आरती उतारी। प्रदेश के होमगार्ड मंत्री धर्मवीर प्रजापति और महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाह भी बरात में शामिल हुई। राजा दशरथ बने संतोष शर्मा अपने कुनबे के साथ चार बग्घियों पर सवार होकर बरात में चले।
राम बरात में कहीं शिव तांडव देखकर भक्तों के हाथ जुड़ गए। कहीं राम विवाह का दृश्य देखकर लोग भाव-विभोर हो रहे थे। बारह बैंड रामधुन बजाकर माहौल को भक्तिमय बना रहे थे। बरात में 110 फीट की तिरंगा यात्रा के साथ शहीद कैप्टन शुभम गुप्ता के बलिदान की झांकी भी दिखी। रात के समय राम बरात की झांकियां और ज्यादा मनमोहक नजर आईं। बाबा नीम करोरी, बैल पर भगवान शंकर, खाटू श्याम, भारत को राइफल शूटिंग में मिले स्वर्ण पदक, प्रेम मंदिर की झांकी भी दर्शनीय रहीं।
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