नमन है उन लोगों को, उन संस्थाओं को जो भूखों को भोजन कराती हैं
जिन में प्राण होते हैं उन्हें तीन चीज की मूलभूत आवश्यकता होती है, रोटी, कपड़ा और मकान। ईश्वर ने सबको जीवित रहने के लिए एक मुंह और पेट दिया है, जिससे वह भोजन करके अपना जीवन यापन और स्वस्थ रहता है। आज दुनिया भर में तमाम ऐसे लोग हैं जिन्हें एक समय का भोजन भी नसीब नहीं होता है। पूरा विश्व इस बात को लेकर न केवल चिंतित है बल्कि उसकी व्यवस्था में रहता है कि सभी लोगों को भरपेट भोजन नसीब हो।
28 मई को मनाया जाने वाला विश्व भूख दिवस वैश्विक भूख के गंभीर मुद्दे पर प्रकाश डालता है, जिससे दुनिया भर में लगभग 811 मिलियन लोग प्रभावित हैं। वर्ष 2011 से विश्व भूख दिवस के रूप में शुरुआत हुई, ताकि हम सक्षम, संपन्न और सामाजिक लोगों के माध्यम से जो भी प्राणी है चाहे वह जीव हो या मनुष्य, वह भूखा न रहे उसके लिए काम करते हैं और सामाजिक जिम्मेदारी समझी जाती है। आजकल इसी बात को देखते हुए अनेक सरकार निचले स्तर के नागरिकों को अपने जीवन यापन के लिए राशन तक फ्री देती हैं ताकि वह भरपेट अपने परिवार के साथ भोजन कर सके।
आज आगरा में भी अनेक सामाजिक संस्थाएं कोई भूखा न सोए की मानसिकता को लेकर बहुत ही कम पैसे में या यह कहिए फ्री में खाना खिलाती हैं।
विकासशील देशों के लिए यह बहुत शर्म की बात होनी चाहिए क्योंकि सभी प्राणियों को अगर भोजन नहीं मिलता है तो वह या तो कुपोषण के शिकार होते हैं या वह आत्महत्या के लिए मजबूर हो जाते हैं यहां तक कि वह चोरी, डकैती और हत्या करने से भी नहीं घबराते हैं। विशेष करके महिलाओं और बच्चों के लिए भोजन की व्यवस्था अवश्य होनी चाहिए, क्योंकि बच्चे ही देश का भविष्य होते हैं और महिलाओं को प्रजनन के समय शारीरिक बल की आवश्यकता होती है।
शहर की कई संस्थाओं के साथ ही "अक्षय पात्र" भी अपने सहयोगियों के साथ इस काम में दिन-रात लगा हुआ है। शहर की सबसे पुरानी और जिम्मेदार संस्था क्षेत्र बजाजा रोज सुबह और शाम दोनों वक्त भोजन उपलब्ध कराती है, जिसका कोई भी शुल्क नहीं लिया जाता है। आपको जान कर आश्चर्य होगा कि तीन-तीन साल की क्षेत्र बजाजा में भोजन कराने वालों की बुकिंग है जो अपने परिजनों के किसी न किसी अवसर को लेकर बुक कराई हुई होती हैं।
भगवान टॉकीज पर शहर के प्रमुख उद्यमी पूरन डावर के माध्यम से भी भोजन व्यवस्था की जाती है उनके साथ संस्था राउंड टेबल 250 लोगों की प्रतिदिन की उन्होंने जिम्मेदारी ले रखी है। इसी तरीके से संजय प्लेस में, बल्केश्वर में, गोविन्दा के माध्यम से मेडिकल कॉलेज में, बेलनगंज क्षेत्र में, sos संस्था के प्रोफेसर नवीन गुप्ता के माध्यम से राजा मंडी पर भी ₹10 में थाली दी जाती है। टेम्पो चलाने वाले साथ देते हैं। इसके अलावा तमाम जगह भोजन कराया जाता है।
हम लोगों को भिखारी को भीख न देकर उन्हें खाद्य पदार्थ या भोजन के टोकन वितरित करने चाहिए ताकि उस वह काम करने की आदत के साथ अपने परिवार का भी पेट पाल सके। सभी सामाजिक संस्थाएं इस काम को और बढ़-चढ़ कर करें। हर क्षेत्र में अगर ऐसा एक स्थान होगा तो निश्चित रूप से शहर में कोई भी आदमी भूखा नहीं सो पाएगा। सामाजिक संस्थाओं के साथ-साथ शहर के तमाम मंदिरों में भी गुरुद्वारों के तरीके से लंगर की अगर व्यवस्था की जाए, तो विश्व भूख दिवस की सार्थकता बन सकती है।
उन सभी लोगों को प्रणाम है जो भूखों को खाना खिलाते हैं। साथ ही उन व्यक्तियों को भी नमन है जो पशु-पक्षियों के लिए भी भोजन की व्यवस्था करते हैं।
राजीव गुप्ता जनस्नेही
लोक स्वर, आगरा
Email- rajeevsir.taj@gmail.com
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