राजनीतिज्ञों के भ्रष्टाचार पर चोट एक समृद्ध लोकतंत्र के लिये आवश्यक

आलेख/नजरिया
- पूरन डावर, सामाजिक चिंतक व राजनीतिक विश्लेषक
अरविंद केजरीवाल केवल अपने भाषणों, अपनी मांगों, अपनी आकांक्षाओं और अपनी अपेक्षाओं का रिकैप करें। भाजपा सरकार में वही हो रहा है जोकि बोलते आ रहे हैं.. बिना सबूतों के आरोप लगाना, इस्तीफे की मांग करना, गिरफ्तारी की माँग करना, ईडी और सीबीआई को निकम्मा बताना, कार्यवाही नहीं कर सकते तो दफ़्तर बंद कर दें, सोनिया को गिरफ़्तार नहीं कर सकते, शीला को गिरफ़्तार नहीं कर सकते तो दफ़्तर पर ताला लगा दो, आशंका थी हम सत्ता में आयें तो भ्रष्ट न हो जायें, मनीष सिसौदिया मेरा सगा नहीं है, चोरी करेगा तो जेल जाएगा, मैं चोरी करूँगा तो जेल जाऊँगा ..! अब ईडी अपना काम कर रही है, सीबीआई अपना काम कर रही है कोर्ट अपना काम कर रहे हैं। 
भाजपा नेता चोरी कर रहे हैं? तो ईडी को सबूत दो। ईडी न माने तो कोर्ट में अपील करो। हवा में आरोप लगाना कि भाजपा वालों को क्यों नहीं पकड़ते, सबूत हो तो दर्ज कराओ। आज नहीं तो कल कार्यवाही होगी ही। अब समय है हवा में आरोप लगाने वाले मात्र मानहानि में माफ़ी माँगने तक नहीं, बल्कि जो आरोप लगाओगे तो ग़लत पाने पर सजा मिले, इस पर ज्यूरी सख्त हो।
अब किसी राजनीतिज्ञ के पास यदि सत्ता है, तो वह भ्रष्टाचार का लाइसेंस नहीं है, पहले फ्रेंडली मैच होता था, किसी राजनीतिज्ञ या किसी सरकार पर कार्यवाही नहीं होती थी, अब हो रही है तो लोकतंत्र ख़तरे में नज़र आता है। लोकतंत्र पर ख़तरे का आरोप सिर्फ़ एक कारण से है अब उनके पास राजनीतिज्ञ होने का सुरक्षा कवच नहीं है।
भाजपा वालों को भी आज ध्यान रखना होगा यदि वे भ्रष्टाचार करते हैं तो आज नहीं तो कल उनका नंबर भी आएगा। जब आप नहीं बख्श रहे तो उनकी सरकार में आपको कौन बख्शेगा। यही अंतर तो मोदी जी ला रहे हैं इसी से तो राजनीति स्वच्छ होगी।
(लेखक पूरन डावर आगरा के प्रमुख उद्योगपति और सामाजिक चिंतक व राजनीतिक विश्लेषक हैं। इस लेख में प्रस्तुत विचार उनके निजी हैं।)

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