बीआईएस जरूरी, इसके बिना जूता उद्योग में समृद्धि संभव नहीं- राजेंद्र जालान
आगरा, 29 मार्च। चर्म निर्यात परिषद के चेयरमैन राजेंद्र जालान ने यहां कहा कि बी.आई.एस. देश के लिए बेहद जरूरी है, इसके बिना जूता उद्योग में समृद्धि नहीं आ पाएगी। उन्होंने कहा कि बीआईएस को लागू करने के पीछे सरकार की मंशा घटिया गुणवत्ता वाले विदेशी जूतों का आयात रोकना है।
जालान शुक्रवार को मथुरा रोड पर ग्राम सींगना में आगरा ट्रेड सेंटर में तीन दिवसीय आगरा फुटवियर एक्सपो का उदघाटन करने के बाद उपस्थितजनों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि देश में 75 प्रतिशत चमड़े का और 25 प्रतिशत सिंथेटिक जूता बिकता है। लेकिन एक सर्वे में यह सामने आया है कि वर्ष 2030 तक यह स्थिति उलट हो जाएगी यानि 75 प्रतिशत सिंथेटिक जूते की मांग होगी। इसके लिए हम सरकार के साथ मिलकर नई योजनाएं बनाने का प्रयास कर रहे हैं। नई नीति बनाने की कोशिशें जारी हैं। सरकार सभी जायज मांगों को मानने को तैयार हैं। उद्यमियों से कहा गया है कि वे सही वजहों के साथ पांच जून तक अपनी मांगों और सुझावों को तैयार कर लें। पंद्रह जून से शासन स्तर पर उन पर मंथन शुरू हो जाएगा। जालान ने कहा कि देश के उद्यमियों को अपने उत्पादों की ब्रांडिंग पर ध्यान देना होगा। परफोर्मेंस फुटवियर बनाने और उत्पादन बढ़ाने पर जोर देना होगा।
उदघाटन समारोह को संबोधित करते हुए एफमेक के अध्यक्ष पूरन डावर ने कहा कि कोई भी उद्योग छोटा नहीं होता, मेहनत और लगन से काम किया जाए तो यह बड़ा रूप ले लेता है। आगरा की चालीस प्रतिशत जनता प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जूता उद्योग से जुड़ी हुई है। जूता उद्योग आज 27 बिलियन की इंडस्ट्री बन चुकी है। हालांकि विश्व में हमारी भागीदारी केवल तीन प्रतिशत है, जो चिंता का विषय है।
डावर ने कहा कि यह कम पूंजी में अधिक रोजगार देने वाला उद्योग है। हाथ से बने जूतों का महत्व कम नहीं होने जा रहा, लेकिन बड़े स्तर पर उत्पादन के लिए मशीनों की भी बड़ी उपयोगिता है। वर्तमान आधुनिक तकनीकी के युग में दस्तकार भी अपनी ऑनलाइन मार्केटिंग कर सकता है, इसके लिए केवल उसका शिक्षित होना आवश्यक है।
नारों का महत्व बताते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 1857 में आजादी के नारे लगने शुरू हुए, नब्बे साल बाद इन नारों से ही वर्ष 1947 में आजादी मिली। इसी तरह मेक इन इंडिया, लोकल फॉर वोकल जैसे नारों का असर अगले सालों में जरूर दिखेगा और देश औद्योगिक क्रांति की ओर अग्रसर होगा।
उत्तर प्रदेश लघु उद्योग निगम के उपाध्यक्ष राकेश गर्ग ने कहा कि प्रदर्शनियां उद्योगों को आगे ले जाती हैं। सरकार उद्योगों को काफी बढ़ावा दे रही है लेकिन इच्छा शक्ति उद्यमियों को ही पैदा करनी होगी। उन्होंने कहा कि जूता उद्योग को चीन से कड़ी चुनौती मिल रही है। इस चुनौती का योजनाबद्ध तरीके से सामना करना होगा।
कार्यक्रम को संयुक्त निदेशक अनुज कुमार, प्रदीप कुमार पिप्पल, अंबा प्रसाद गर्ग, अमर मित्तल, विजय गुप्ता, देवकीनंदन, राहुल जैन ने भी संबोधित किया।
इस तीन दिवसीय प्रदर्शनी के 75 से अधिक फुटवियर कंपनियां भाग ले रही हैं। जिनमें 25 से ज्यादा ब्रांड सेंडल, चप्प्ल, लेदर शू, फ्लिप फ्लॉप, स्नीकर्स आदि सहित इंडस्ट्री उत्पाद के बड़े ब्रांड देखने को मिल रहे हैं।
तीन दिवसीय फुटवियर एक्सपो सुबह 10 बजे से सायं 6 बजे तक दर्शकों के लिए खुला रहेगा। 30 मार्च को सुबह 11:30 बजे से तकनीकी सत्र रहेगा जिसमें एमएसएमई के द्वारा ग्लोबल मार्केटिंग पर चर्चा, व्यापार में आर्थिक उन्नति पर विश्लेषण, फुटवियर ब्रांड बिल्डिंग एवं बिल गेट्स की संस्था पीएसआई द्वारा कर्मचारियों के मेडिकल वेलफेयर की जानकारी दी जाएगी।
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