"यशोदा" को ही मिलेगी "कायनात," दावा करने वालों का डीएनए नहीं हुआ मैच, आठ साल पालने वाली मां को ही सौंपी जाएगी बच्ची
आगरा, 30 जनवरी। यहां राजकीय बाल गृह में निरुद्ध बालिका को उसकी पालनहार मां के सुपुर्द किया जाएगा। बालिका पर दावा करने वाले दंपति का डीएनए मैच नहीं हुआ।
दावा करने वाले दंपति ने कहाकि उन्हें तो संस्था ने बुलाकर दावा करने के लिए कहा था। संस्था ने ही डीएनए टेस्ट के लिए प्रार्थना पत्र लिखवाया और इसकी फीस भी जमा करवाई।
राजकीय बाल गृह में निरुद्ध बालिका की कस्टडी का मामला हाईकोर्ट में चल रहा था। ट्रांस यमुना कॉलोनी निवासी नितिन गर्ग ने बच्ची पर दावा प्रस्तुत किया था। मगर, बच्ची के साथ उनका डीएनए मैच नहीं हुआ। इसके बाद नितिन गर्ग ने जारी किए वीडियो में कहाकि उनके पास संस्था से कॉल आई थी। कहा गया कि आपकी बच्ची लापता हुई थी। एक बच्ची मिली है। उसे आकर देख लें। इसके बाद वह संस्था के पदाधिकारियों से मिले तो उन्होंने राजकीय बाल गृह में निरुद्ध बालिका पर अपना दावा प्रस्तुत करने के लिए प्रार्थनापत्र लिखवाया। साथ ही उनकी बच्ची की लापता रिपोर्ट की प्रति लगाने को कहा था। 22 नवंबर, 2023 को दोबारा संस्था से बुलाया गया। कहा गया कि आपका डीएनए टेस्ट होगा। इसके लिए उन्होंने प्रार्थनापत्र लिखवाया था। वहीं नितिन की पत्नी ऋचा ने कहा कि उन्हें बच्ची के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। केवल अखबारों में पढ़ा था। उस बच्ची की फोटो जब दिखाई गई तो उन्हें अपनी बेटी होने का कोई अहसास नहीं हुआ। वह बच्ची उनकी बेटी से उम्र में भी बड़ी नजर आई थी। उन्होंने इस संबंध में अपनी ओर से कोई दावा नहीं किया था। यह सब संस्था ने करवाया।
सोमवार को सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला मीना के पक्ष में सुनाया। कोर्ट ने बच्ची की सुपुर्दगी उसी 'यशोदा मां' को दी है, जो उसे आठ साल तक पालती पोसती रही।
इस पूरे घटनाक्रम में एक किन्नर ने ट्विस्ट पैदा कर दिया था। किन्नर ने ही बच्ची को मीना के पास छोड़ दिया था। किन्नर अंजलि को वह बच्ची नवजात हालत में वर्ष 2014 में झाड़ियों में पड़ी मिली थी। अंजलि नवजात बच्ची को लेकर आगरा, टेढ़ी बगिया की रहने वाली मीना देवी के घर पहुंच गई। लेकिन मीना देवी ने बच्ची को लेने से इनकार कर दिया, क्योंकि उसके पहले से ही चार बच्चे थे। मगर किन्नर ये कहकर चली गई कि पालना हो तो पाल लेना नहीं तो इसे कहीं फेंक देना। कुछ ही घंटों की मासूम बच्ची को रोते देख मीना की ममता पसीज गई और उसने बच्ची को पालने का निर्णय ले लिया। मीना ने अपना खून तक देकर उसका इलाज कराया। बच्ची का नाम कायनात रखा। घर में पालन पोषण करने लगी। कायनात का अंग्रेजी मीडियम स्कूल में एडमिशन भी करवा दिया। कायनात जब आठ साल की हो गई तो किन्नर उस पर दावा करने वापस आ गई। वह कायनात को वर्ष 2021 में मीना के घर से ले गई। मीना की शिकायत पर बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) ने कायनात को फर्रुखाबाद से बरामद कर लिया। 22 दिसंबर, 2021 को सीडब्ल्यूसी ने कायनात को मीना की सुपुर्दगी में दे दिया।
इसके बाद अगस्त 2022 में किन्नर ने सीडब्ल्यूसी में शिकायत कर दी कि मीना किराए के मकान में रहती है। वह बच्ची के पालन पोषण में लापरवाही बरत रही है। इसके बाद सीडब्ल्यूसी ने बच्ची को राजकीय बाल गृह में रखवा दिया। तब से कायनात अपनी पालनहार मां मीना से दूर शिशु गृह में अपनी जिदंगी काट रही थी। चाइल्ड राइट एक्टिविस्ट नरेश पारस ने यह मामला राज्य बाल आयोग में उठाया। बाल आयोग की सदस्य ने भी बच्ची को पालनहार की सुपुर्दगी में देने की बात कही थी।
इस पूरे घटनाक्रम में एक तीसरे व्यक्ति नितिन गर्ग ने दस्तक देकर मामले को और पेचीदा बना दिया। नितिन गर्ग ने दावा पेश किया कि उसकी बेटी को एक किन्नर उठा ले गया था। कायनात वही बच्ची है। लेकिन नितिन गर्ग ने बच्ची के अपहरण की जो तिथि बताई थी वह 18 नवंबर 2015 थी जोकि एक साल बाद की थी। इस पर नितिन गर्ग ने अपने डीएनए के मिलान कराने की मांग की थी। 8 दिसंबर 2023 को इलाहाबाद हाई कोर्ट में सुनवाई हुई तो कोर्ट ने डीएनए रिपोर्ट आने के बाद निर्णय लेने की बात कही।
29 जनवरी को न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और मंजीव शुक्ला की कोर्ट में सुनवाई हुई। मीना अपने वकील और चाइल्ड राइट एक्टिविस्ट नरेश पारस के साथ कोर्ट में मौजूद थी।
कोर्ट ने दावा पेश करने वाले नितिन की डीएनए रिपोर्ट देखी जो कि कायनात के साथ मैच नहीं हो रही थी। इस पर नितिन के वकील से आगे कोई और दावा पेश करने की बात कही तो नितिन के वकील ने मना कर दिया। हालांकि बच्ची के लिए दावा पेश करने वाले नितिन कोर्ट में हाजिर नहीं हुए थे। करीब एक घंटे तक चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने बच्ची को पालनहार मां मीना की सुपुर्दगी में सौंपने का अपना निर्णय सुनाया। कोर्ट ने ये भी आदेश दिया है कि एक सप्ताह के भीतर मीना से गोद लेने की विधिवत प्रक्रिया पूरी करा ली जाए।
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