संकट में कपड़ा उद्योग-व्यापार, रद्द हो रहे बुकिंग ऑर्डर! 15 से 45 दिनों के भीतर भुगतान अनिवार्य करने से व्यापारियों में नाराजगी
आगरा, 28 जनवरी। एमएसएमई क्लॉथ और गारमेंट्स व्यापारियों और निर्माताओं पर नए नियम 43बी(एच) लागू होने कपड़ा व रेडीमेड गारमेण्ट व्यवसाई उद्वेलित हैं। इस नियम के तहत सूक्ष्म और लघु निर्माताओं और व्यापारियों को 15 से 45 दिनों के भीतर भुगतान अनिवार्य कर दिया गया है। व्यापारियों का कहना है कि सरकार के इस फैसले से परिधान व्यापार और उद्योग पूरी तरह से नष्ट हो जाएगा। इसके प्रतिकूल प्रभाव दिखने भी लगे हैं। खुदरा विक्रेता गर्मी के मौसम के लिए नए ऑर्डर नहीं दे रहे हैं। बल्कि उन्होंने जो ऑर्डर बुक किए हैं, उन्हें रद्द करना शुरू कर दिया है।
इंडियन फेडरेशन ऑफ गारमेंट एसोसिएशन की विगत दिवस बेंगलुरु में हुई बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिख कर इस निर्णय पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया गया। बैठक में शामिल रहे आगरा रेडीमेड गारमेंट्स ट्रेडर्स एंड मेनुफ़ैक्चरर एसोसिएशन के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के प्रभारी आर के नैयर ने बताया कि बैठक में कहा गया कि करीब पंद्रह करोड़ से अधिक व्यक्ति निर्माता और व्यापारियों के रूप में कपड़ा और परिधान व्यापार-उद्योग में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगे हुए हैं। वे इस समय सबसे अधिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
ऑनलाइन व्यापार करने वाली बड़ी कंपनियों के परिधान खुदरा बिक्री में प्रवेश करने से पारंपरिक स्टैंड-अलोन कपड़ों की दुकानें लगभग ढहने के कगार पर हैं। कम बिक्री के कारण भुगतान की वसूली में असाधारण देरी हो रही है। निर्माताओं को इकाई के प्रबंधन में चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, जबकि खुदरा दुकान के मालिक को पहले दुकान के खर्च और घर के खर्च का प्रबंधन करना पड़ता है। इसलिए खुदरा विक्रेताओं की ओर से भुगतान में बहुत देरी हो रही है।
नियम 43बी(एच) के लागू होने से सूक्ष्म और लघु क्षेत्र पर सीधा असर पड़ेगा। खरीदारों और आपूर्तिकर्ताओं की श्रृंखला प्रभावित होगी जिसके परिणामस्वरूप व्यवसाय बड़ी कंपनियों की ओर स्थानांतरित हो जाएगा।
बेंगलुरु में हुई बैठक में साउथ इंडिया गारमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष एवम् इंडियन फेडरेशन ऑफ गारमेंट एसोसिएशन महासचिव अनुराग सिंघला, रेडीमेड गारमेंट एजेंट्स एसोसियेशन मुम्बई के सचिव जयेश मेहता भी मौजूद थे।
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