भाइयों ने मना किया तो पत्नी बनी सहारा, 12 साल बाद लौट आई शैलेश की आंखों की रोशनी

आगरा, 28 अक्टूबर। सगे भाइयों के मदद से इंकार करने के बाद पत्नी अपने पति का सहारा बनी और उसके द्वारा दिए गए टिश्यू से पति की आंखों की रोशनी लौट आई। एसएन मेडिकल कॉलेज में "आई बैंक" की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शेफाली मजूमदार की डेढ़ साल की मेहनत भी रंग लाई और उनके प्रयासों से मरीज शैलेश की जिंदगी में रोशनी के रंग भर गए।
शैलेश की आंखों की रोशनी 12 साल पहले चली गई थी और उसका जीवन अंधकारमय हो गया था। शैलेश ने एम्स से लेकर कई अस्पतालों में इलाज कराया। लेकिन फायदा नहीं हुआ। आगरा के एक डॉक्टर की सलाह पर शैलेश एसएन मेडिकल कॉलेज पहुंचकर डॉ. शेफाली से मिले। करीब डेढ़ साल उनका इलाज चला और आज शैलेश अपनी आंखों से दुनिया के हर रंग को देख सकते हैं।
जिले के पिनाहट ब्लॉक के क्योरी गांव के रहने वाले शैलेश की आंखों की रोशनी 12 साल पहले अचानक चली गई थी। उनकी आंखों में लिंबल स्टेम सेल डिफिशिएंसी की बीमारी हो गई थी, जिसे नाखूना भी कहा जाता है। किसानी करने वाले शैलेश की आर्थिक स्थिति खराब थी। वह अच्छे अस्पतालों में अपना इलाज नहीं कर पा रहे थे। 38 साल के शैलेश की जिंदगी अंधकार में डूब गई। उनका धंधा चौपट हो गया।
शैलेश इलाज कराने के लिए दिल्ली एम्स गए। दो महीने तक इलाज चला। लेकिन फायदा नहीं हुआ। उन्होंने कई और अस्पतालों में भी अपना इलाज कराया, लेकिन फर्क नहीं पड़ा। फिर शैलेश ने यहां एसएन मेडिकल कॉलेज में आई बैंक इंचार्ज डॉ. शेफाली मजूमदार को समस्या बताई। डॉ शेफाली ने उनका इलाज शुरू कर दिया।
डॉ. शेफाली ने बताया कि लिंबल स्टेम सेल डिफिशिएंसी बीमारी का इलाज लिंबल स्टेम सेल ट्रांसप्लांट से होता है, जिसके लिए खून के रिश्ते वाले व्यक्ति की स्वस्थ आंख से लिंबल स्टेम सेल ओकुलर सतह एपीथेलियम को फिर से भरने के लिए एक दूसरी आंख से सेल लेकर ट्रांसप्लांट किया जाता है। यह सर्जरी बहुत बारीक होती है। एसएन मेडिकल कॉलेज में यह इस तरह की पहली सर्जरी है, जो सफल रही है।
अब तक यह सर्जरी केवल विदेश में ही की जाती थी। डॉ. शेफाली ने बताया कि शैलेश की आंख को सही करने के लिए उनके किसी ब्लड रिलेटिव की आंख का टिश्यू चाहिए था। जब उनके भाइयों से बात की गई, तो उन्होंने मना कर दिया। शैलेश को बताया गया कि आपके बच्चे की आंख का टिश्यू भी काम आ सकता है। लेकिन शैलेश ने बच्चे के लिए मना कर दिया। आखिरकार उनकी पत्नी की काउंसलिंग की गई और शैलेश की पत्नी की आंख का टिश्यू लेकर उनकी आंख सही की गई।
शैलेश अब 12 साल बाद अपनी आंखों से दुनिया देख रहे हैं। एक बार फिर से उनके जीवन में उजाला हुआ है। शैलेश का कहना है, "यह सब नेत्र विभाग की टीम और डॉ शेफाली मजूमदार की बदौलत हुआ, जो मेरे लिए भगवान से कम नहीं हैं।"
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