....तो आरक्षित 22 वार्ड अब सामान्य हो जाएंगे?

आगरा, 27 दिसम्बर। नगर निकाय चुनाव को लेकर हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के फैसले के बाद नगर निगम के 100 वार्डों में से पिछड़े वर्ग और पिछड़ा वर्ग महिला के लिए आरक्षित किए गए 22 वार्ड अब सामान्य की श्रेणी में आ सकते हैं। यह स्थिति सरकार और सुप्रीम कोर्ट के रुख पर तय होगी। यदि सरकार हाईकोर्ट के निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गई और वहां से सरकार के पक्ष में निर्णय हुआ तो स्थितियां अप्रभावित भी रह सकती हैं।
नगर निगम के वार्डों की जो आरक्षण सूची पूर्व में जारी की गई थी, हाईकोर्ट के आदेश के बाद उसमें जगदीशपुरा पूर्वी पिछड़ा वर्ग महिला से अब सामान्य, घास की मंडी पिछड़ा वर्ग महिला से अब सामान्य, नगला मोहन पिछड़ा वर्ग से अब सामान्य, कछपुरा पिछड़ा वर्ग महिला से अब सामान्य, सराय मलूक चंद पिछड़ा वर्ग महिला से अब सामान्य, ढोलीखार पिछड़ा वर्ग महिला से अब सामान्य,  बुन्दू कटरा पिछड़ा वर्ग महिला से अब सामान्य सीट हो सकती है।
इसी प्रकार बारहखंभा पिछड़ा वर्ग से अब सामान्य, जागेश्वर नगर पिछड़ा वर्ग से अब सामान्य, अजीत नगर ओबीसी से अब सामान्य, डेरा सरस ओबीसी से अब सामान्य, देवनगर पिछड़ा वर्ग महिला से अब सामान्य, मंटोला पिछड़ा वर्ग महिला से अब सामान्य, उखर्रा पिछड़ा वर्ग महिला से अब सामान्य, नराइच पश्चिम ओबीसी से अब सामान्य, दहतोरा पिछड़ा वर्ग से अब सामान्य, शहीद नगर पिछड़ा वर्ग से अब सामान्य, जटपुरा पिछड़ा वर्ग से अब सामान्य, भीमनगर पिछड़ा वर्ग से अब सामान्य, राजामंडी पिछड़ा वर्ग महिला से अब सामान्य, केके नगर पिछड़ा वर्ग सेअब सामान्य,  विभव नगर पिछड़ा वर्ग से अब सामान्य सीट हो सकती है।
गौरतलब है कि प्रदेश में होने वाले नगर निकाय चुनावों को लेकर हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने मंगलवार को जारी आदेश में कहा कि जब तक ट्रिपल टेस्ट नहीं हो, तब तक ओबीसी आरक्षण नहीं होगा। सरकार या निर्वाचन आयोग बिना ओबीसी आरक्षण के चुनाव करा सकता है। हाईकोर्ट बेंच ने राज्य सरकार को झटका देते हुए निकाय चुनावों के लिए विगत पांच दिसंबर को जारी ड्राफ्ट नोटिफिकेशन को खारिज कर दिया। इसके साथ ही न्यायालय ने राज्य सरकार को निकाय चुनावों को बिना ओबीसी आरक्षण के ही कराने के आदेश दिए हैं।
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