दुनिया की सबसे ऊंची शिव प्रतिमा नाथद्वारा में बनकर तैयार
नई दिल्ली, 28 अक्टूबर। दुनिया की सबसे ऊंची शिव प्रतिमा “विश्वास स्वरूपम” नाथद्वारा में बनकर तैयार हो गई है। राजस्थान में राजसमंद जिले के नाथद्वारा में बनी शिव प्रतिमा की ऊंचाई 369 मीटर है। कल 29 अक्टूबर को प्रतिमा का लोकार्पण समारोह शुरू होने जा रहा है।
इस शिव प्रतिमा को “विश्वास स्वरूपम” नाम दिया गया है। प्रतिमा को बनाने में दस साल का समय लगा। इसे दुनिया की टॉप-5 ऊंची प्रतिमाओं में स्थान मिला है। इसे संत कृपा सनातन संस्थान द्वारा तैयार किया गया है। लोकार्पण समारोह 29 अक्टूबर से शुरू होकर छह नवंबर तक चलेगा।
नाथद्वारा की गणेश टेकरी पर बनी यह प्रतिमा 51 बीघा की पहाड़ी पर बनी है। इस प्रतिमा में भगवान शिव ध्यान एवं अल्लड़ की मुद्रा में विराजित हैं। प्रतिमा की ऊंचाई इतनी है कि कई किलोमीटर दूर से ही नजर आने लग जाती हैं। रात में भी यह प्रतिमा स्पष्ट रूप से दिखाई दे, इसके लिए विशेष लाइट्स की व्यवस्था भी की गई है।
369 फीट ऊंची “विश्वास स्वरूपम” विश्व की सबसे ऊंची शिव प्रतिमा बनने की कहानी भी दिलचस्प है। वर्ष 2012 में जब इस प्रतिमा को बनाने का प्लान बना तो इसकी ऊंचाई 251 मीटर रखने की योजना बनाई गई। लेकिन निर्माण के दौरान इसकी ऊंचाई 351 मीटर तक पहुंच गई। इसके बाद शिव की जटा में गंगा की जलधारा लगाने की योजना बनाई गई, तो इसकी ऊंचाई 369 मीटर तक पहुंच गई।
इस प्रतिमा में लिफ्ट, सीढ़ियां, हॉल आदि भी बनाए गए हैं। निर्माण के दौरान 3000 टन स्टील और लोहा, 2.5 लाख क्यूबिक टन कंक्रीट और रेत का इस्तेमाल हुआ। मूर्ति को 250 किमी रफ्तार से चलने वाली हवाएं भी प्रभावित नहीं करेगी। 'स्टेच्यू ऑफ बिलीफ’ की कल्पना मिराज ग्रुप, उदयपुर के चेयरमैन मदन पालीवाल ने की थी। इस अवधारणा को स्टूडियो माटुराम आर्ट द्वारा विकसित किया गया, जिसने 351 फीट ऊंची मूर्ति को डिजाइन किया, जबकि संरचनात्मक डिजाइन स्केलेटन कंसल्टेंट्स द्वारा प्रदान किया गया और काम वर्ष 2016 की शुरुआत में शुरू हुआ।
विश्वास स्वरूपम प्रतिमा को बनने में दस साल लगे। पचास हजार से ज्यादा लोगों ने यह प्रतिमा बनाई। जिस परिसर में इसे बनाया गया है, उसे तद पदम उपवन नाम दिया गया है। जब भी आप यहां जाएंगे तो आराम से सात से आठ घंटे बिता सकेंगे। प्रतिमा इतनी विशाल है कि इसे पूरा देखने में कम से कम चार घंटे लगेंगे।
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