गुजरात पुल हादसे में मृतक 160 से अधिक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल मंगलवार को मोरबी पहुंचेंगे
छह माह से बंद पुल पांच दिन पहले ही जनता के लिए खोला गया थारखरखाव करने वाली कंपनी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज, नौ हिरासत में
मोरबी (गुजरात), 31 अक्टूबर। मोरबी जिले में माच्छू नदी पर केबल पुल टूटने से सोमवार को मरने वालों की संख्या बढ़कर 160 से अधिक हो जाने की सूचना है। हालांकि आधिकारिक तौर पर 134 लोगों के मरने की पुष्टि की गई है। मृतकों में बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की संख्या अधिक है। बचाव व राहत कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल मंगलवार को मोरबी पहुंच रहे हैं। हादसे की एसआईटी जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
पुलिस ने पुल का रखरखाव करने वाली कंपनी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है और नौ लोगों को हिरासत में लिया है। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि मरम्मत एजेंसी व एजेंसी प्रबंधन ने गुणवत्ता जांच या व्यवहार्यता या भार वहन परीक्षण किए बिना आगंतुकों के लिए पुल खोल दिया।
एक सदी से अधिक पुराने इस पुल को व्यापक मरम्मत और नवीनीकरण के बाद पांच दिन पहले ही फिर से खोला गया था। पुल छह महीने से बंद था। रविवार शाम करीब 6.30 बजे टूटने से पहले यह लोगों से भर गया था। करीब 170 लोग रेस्क्यू किए गए हैं।
गुजरात के गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी ने राज्य की राजधानी से लगभग 300 किलोमीटर दूर मोरबी में संवाददाताओं से कहा कि राज्य सरकार ने ढहने की जांच के लिए एक समिति का गठन किया है।
प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि ब्रिटिश काल में बने “हैंगिंग ब्रिज” पर कई महिलाएं और बच्चे थे। ढहने के बाद, पुल का जो कुछ बचा था, वह धातु के कैरिजवे का हिस्सा था, जो एक छोर से नीचे गहरे पानी में लटक गया था, इसकी मोटी केबल जगह-जगह टूट गई थी।
गुजरात हादसे से पूरा देश दुःखी
गुजरात के साथ पूरा देश दुःखी है। लापरवाही के कारण एक हादसा कई लोगों की जिंदगी खत्म कर गया, जिसने भी इस घटना के बारे में सुना स्तब्ध रह गया। सैकड़ों लोग रविवार छुट्टी होने की वजह से “पिकनिक” मनाने आए थे। लेकिन एक झटके में ही कई जिंदगी पानी में समा गई। लोगों को संभलने का मौका ही नहीं मिला। हादसे ने कई परिवारों की जिंदगी वीरान भी कर दी है।
इस हादसे ने साल 1912 में हुए “टाइटैनिक जहाज” की याद दिला दी है। टाइटेनिक जहाज इंग्लैंड के साउथेंप्टन से अमेरिका के लिए रवाना हुआ था। 14-15 अप्रैल 1912 को यह जहाज अपने पहले सफर में ही बर्फ के हिमखंड से टकराकर अटलांटिक महासागर में समा गया था। इस हादसे में करीब 2000 लोगों की मौत हुई थी।
मोरबी का केबल ब्रिज 100 साल से ज्यादा पुराना बताया जा रहा है। यह ब्रिटिश शासन के दौरान बनाया गया था। राजा-महाराजाओं के समय का यह पुल ऋषिकेश के राम-झूला और लक्ष्मण झूला पुल की तरह झूलता हुआ-सा नजर आता था, इसलिए इसे झूलता पुल भी कहते थे।
रविवार को यहां लोग परिवार के साथ घूमने आए थे, तभी ये हादसा हो गया, इसके बाद एनडीआरएफ, सेना और फायर ब्रिगेड की टीमें, एंबुलेंस, प्रशासन, डॉक्टरों की टीम मौके पर पहुंच गई, स्थानीय लोगों ने भी रेस्क्यू में मदद की। इसके बाद घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। इस हादसे के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी गुजरात में ही थे। जिसकी वजह से रेस्क्यू का काम बहुत तेज गति से किया गया।
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