रानी सरोज गौरिहार ने ली अंतिम विदाई

सुबह से ही शोक-संवेदना व्यक्त करने वालों का तांता लगा
आगरा, 28 अगस्त। अंतिम दिनों तक सामाजिक तौर पर पूरी तरह सक्रिय रहीं स्वतंत्रता सेनानी और शहर की प्रमुख शख्सियत रानी सरोज गौरिहार का आज तड़के ह्रदयाघात से निधन हो गया। वे लगभग 93 साल की थीं। उनके निधन का समाचार सुनते ही शोक-संवेदना व्यक्त करने वालों का तांता लग गया।
प्रोफेसर कालोनी कमला नगर स्थित अपने निवास पर सुबह करीब चार बजे उन्होंने अंतिम श्वांस ली। सरोज गौरिहार ने शहर को दर्जनों समाजसेवी संस्थाएं देने के साथ महिलाओं को समाज सेवा के लिए मार्गदर्शित भी किया।
स्वतंत्रता सेनानी व प्रदेश के पूर्व मंत्री स्व. जगन प्रसाद रावत व स्वतंत्रता सेनानी स्व. सत्यवती रावत की पुत्री सरोज गौरिहार का जन्म चार नवम्बर, 1929 को आगरा में ही हुआ था। एम.ए., एल.एल.बी., डी.पी.ए., की शिक्षा प्राप्त करने के साथ ही सरोज गौरिहार ने स्वतंत्रता आंदोलन में भी भाग लिया और वर्ष 1943 में उन्होंने एक वर्ष का कारावास भी झेला। वर्ष 1955 में उनका विवाह गौरिहार नरेश प्रताप सिंह भूदेव के साथ हुआ। विवाह के बाद उन्होंने मध्य प्रदेश की राजनीति में प्रवेश किया और वर्ष 1967 में वे मध्य प्रदेश विधान सभा की सदस्य चुनी गईं। वर्ष 1968 में वे अखिल भारतीय ब्रज साहित्य परिषद, भोपाल की अध्यक्ष बनीं। वर्ष 1972 में वे मध्य प्रदेश की राजनीति से अलग होकर लेखन व सामाजिक कार्यों में जुट गई।
उनकी कई पुस्तकें भी प्रकाशित हुईं, जिनमें आनन्द छलिया ब्रज व बुन्देली भाषा के पद संग्रह, माण्डवी, एक विस्मृता खण्ड काव्य, नट नागर- रस आगरा- बृज बुन्देली के पद व दोहे, नभ और धरा के बीच काव्य संग्रह और सप्तपर्णी प्रमुख हैं।
बहुमुखी प्रतिभा की धनी सरोज गौरिहार को कई सम्मानों से भी समय-समय पर नवाजा जाता रहा। वर्ष 1998 में उन्हें अखिल भारतीय ब्रज साहित्य संगम मथुरा द्वारा पंडित देवी दीक्षित पुरस्कार भी दिया गया।
इसके अलावा रोटरी क्लब आगरा, इनरव्हील लॉयनेस क्लब, वसुंधरा कल्याणकारी महिला समिति आगरा, महानगर लेखिका मंच, रत्नदीप साहित्यिक संस्था आदि अनेक संस्थानों द्वारा भिन्न-भिन्न अवसरों पर सम्मानित किया गया। साहित्यकार स्व. विद्यानिवास मिश्र की पुस्तक में ब्रज भाषा की आधुनिक कवि के रूप में भी सरोज जी का उल्लेख किया गया।
सरोज गौरिहार वनिता विकास, जिला ग्रामीण महिला संघ, संगीत कला केन्द्र, चम्बल घाटी लोक सेवा समिति, अखिल भारतीय ब्रज साहित्य परिषद, अखिल भारतीय महिला परिषद, श्री गांधी आश्रम, उदयन शर्मा फाउन्डेशन ट्रस्ट, महाकवि नीरज फाउन्डेशन ट्रस्ट,  महानगर लेखिका मंच, नारी अस्मिता समिति, अभिव्यक्ति-लखनऊ, जिला बाल परिषद, अंतर्राष्ट्रीय वृद्ध जन सम्मान समिति, आचार्य कुल, रफी अहमद किदवई इंटर कॉलेज आदि अनेक संस्थाओं से जुड़ी रहकर सक्रिय भूमिका निभाती रहीं।
दो पुत्रियों की मां सरोज गौरिहार जाने-माने पत्रकार स्व. उदयन शर्मा की सास भी थीं।
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