आनन-फानन में अंतिम सलामी दिलाकर प्रशासन ने बचाई अपनी लाज
स्वतंत्रता सेनानी सरोज गौरिहार को अंतिम सलामी देने में दिखा समन्वय का अभाव
आगरा, 28 अगस्त। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सराेज गौरिहार को अंतिम सलामी देने में जिला प्रशासन के स्तर से समन्वय का अभाव दिखा। न तो उनके कमला नगर स्थित निवास पर सलामी गारद ने उन्हें सलामी दी और न विद्युत शवदाह गृह में। शहरवासियों ने जब डीएम प्रभु एन. सिंह से आपत्ति जताई तो आनन-फानन में कुछ पुलिसकर्मियों को बुलाया गया। वे परम्परागत सलामी गारद के सदस्य नहीं थे, इसलिए उन्हें अंतिम सलामी देना भी नहीं आता था। किसी तरह समझा-बताकर सलामी दिलाई गई। सलामी से पूर्व ही अंतिम क्रिया लगभग हो चुकी थी। इसे लेकर शहरवासियों में काफी नाराजगी देखने को मिली।
श्मशान घाट पर डीएम प्रभु एन. सिंह, एसएसपी प्रभाकर चौधरी, एसपी सिटी विकास कुमार आदि मौजूद थे। वहां कुछ लोगों ने अधिकारियों से अंतिम सलामी न दिए जाने की शिकायत की, इस पर जिलाधिकारी ने कहा कि अंतिम सलामी तो गौरिहार जी के निवास पर दे दी गई। लेकिन इस बात का खंडन श्मशान घाट पर मौजूद विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल ने कर दिया। उन्होंने कहा कि वे गौरिहार जी के घर पर भी मौजूद थे, तब अंतिम सलामी नहीं दी गई। यह सुनते ही अधिकारियों में बेचैनी बढ़ गई।
अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी। पुलिस लाइन से सलामी गारद बुलाने में अधिक समय लगता। इसलिए आनन-फानन में अफसरों के साथ आये पुलिसकर्मियों में से बंदूक वाले सिपाही छांटे गए। एक दरोगा के द्वारा इन सिपाहियों को पहले रिहर्सल कराया गया और उसके बाद उनसे अंतिम सलामी दिलाई गई। सिपाहियों की संख्या पर्याप्त बनाये रखने के लिए उनके पीछे बिना बंदूकधारी सिपाहियों को भी खड़ा किया गया। इसके बाद ही अधिकारियों ने राहत की सांस ली। श्मशान घाट पर शहर के गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। स्व. गौरिहार के पार्थिव शरीर को मुखाग्नि उनकी पुत्री नीलिमा शर्मा ने दी।
इससे पहले उनके कमला नगर स्थित निवास पर केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल, कैबिनेट मंत्री बेबीरानी मौर्य, विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल श्रद्धांजलि देने पहुंचे। तहसीलदार सदर रजनीश वाजपेयी और एसीएम प्रथम रामप्रकाश ने उनके शव पर तिरंगा ओढ़ाया। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर सरोज गौरिहार को श्रद्धांजलि दी।
स्वतंत्रता सेनानी सरोज गौरिहार का आज रविवार की तड़के ह्रदयाघात से निधन हो गया था। तीन दिन पूर्व चेस्ट में इंफेक्शन होने पर उन्हें आगरा हार्ट सेंटर में भर्ती कराया गया था। सुबह 4:15 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन के साथ ही शहर में स्वतंत्रता आंदोलन की अंतिम मशाल भी बुझ गई।
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