मुसीबत बनने लगा आयकर पोर्टल, अंतिम तिथि बढ़ाने की मांग


आगरा, 29 जुलाई। गैर आडिट आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई नजदीक आने के साथ ही आयकर विभाग का पोर्टल बना मुसीबत बनने लगा है। सर्वर के स्लाे चलने के कारण रिटर्न दाखिल करना मुश्किल हो रहा है। हजारों रिटर्न अटके पड़े हैं। इस कारण रिटर्न फाइल करने की तारीख बढ़ाने की मांग तेज होने लगी है।
आयकर विभाग के पोर्टल की सुस्ती के कारण ट्विटर पर हैशटैग इनकम टैक्स ट्रेंड कर रहा है और आयकरदाता व टैक्स प्रोफेशनल रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। इंटरनेट मीडिया व अन्य माध्यमों से भी यह मांग उठाई जा रही है।
आगरा टैक्सेशन बार एसोसिएशन ने अंतिम तिथि बढाने की मांग पीएमओ और इनकम टैक्स विभाग से की है।
गौरतलब है कि आयकर रिटर्न समय से दाखिल न करने पर पांच लाख तक के रिटर्न पर एक हजार व पांच लाख से अधिक के रिटर्न पर पांच हजार तक का विलम्ब शुल्क व ब्याज देना होगा। साथ ही कैरी फारवर्ड लास का फायदा भी नहीं मिलेगा।
गैर आडिट आयकर रिटर्न भरने वालों में ज्यादातर नौकरी पेशा और छोटे करदाता शामिल हैं, जिनकी संख्या अधिक है। वे प्रोफेशनल की सहायता से ही रिटर्न भर पाते हैं। वहीं फार्म 16 व फार्म 26 एएस का डाटा 15 जून को उपलब्ध हुआ, 31 जुलाई तक सिर्फ डेढ़ महीने में लाखों रिटर्न दाखिल करना मुश्किल है क्योंकि पोर्टल लगातार सुस्त चल रहा है। 
कर विशेषज्ञ दीपिका मित्तल की करदाताओं को सलाह
कर विशेषज्ञ सीए दीपिका मित्तल ने करदाताओं को सलाह दी है कि यदि उन्होंने अब तक अपना आयकर रिटर्न दाखिल नहीं किया है तो तुरंत कर लें। वे करदाता जिन्हें अपने रिटर्न के साथ ऑडिट रिपोर्ट नहीं लगानी पड़ती है, के लिए वित्त वर्ष 2021-22 और एसेसमेंट ईयर 2022-23 के रिटर्न भरने की आखिरी तारीख 31 जुलाई, 2022 है। इसके अलावा पर्सनल एच यू ऍफ़  के लिए आयकर रिटर्न भरने की अंतिम तारीख भी 31 जुलाई ही है। ऐसा नहीं करने पर आयकर कानून के प्रावधानों के अनुसार जुर्माना भरना पड़ सकता है।
दीपिका मित्तल का कहना है कि आयकर विभाग ने इस बार आयकर रिटर्न को और आसान एवं पारदर्शी बनाने के लिए कुछ नियमों में बदलाव भी किए हैं। ऐसे में जरूरी है कि करदाता अपनी सही और सभी जानकारी अपने रिटर्न फॉर्म में दिखायें। आयकर विभाग ने इस बार दो नए फॉर्म एनुअल इन्फॉर्मेशन स्टेटमेंट (एआईएस) और टैक्सपेयर इन्फॉर्मेशन समरी (टीआईएस) के रूप में जारी किए हैं। इसमें करदाता का पूरा वित्तीय लेखाजोखा होता है। एआईएस फॉर्म 26एएस  की तुलना में ज्यादा जानकारी प्रदान करता है। 26एएस में केवल हाई वैल्यू के ट्रांजैक्शन और टीडीएस का उल्लेख किया जाता है जबकि एआईएस में आपके सेविंग बैंक इंटरेस्ट, डिविडेंड, कैपिटल गेन और शेयर ट्रांजैक्शन जैसे सभी विवरण शामिल होते हैं। वहीँ टीआईएस फॉर्म आपको रिटर्न भरने में काफी मदद करते है क्योकि इसमें करदाता की कुल टैक्सेबल आय की जानकारी होती है। जो व्यक्ति इनकम टैक्स के दायरे में नहीं आता है और यदि उसका टीडीएस कट रहा है तो इसका रिफंड तभी मिलेगा जब आयकर रिटर्न दाखिल किया जाएगा। रिटर्न जमा करने के बाद ही उसका आयकर विभाग द्वारा आकलन होता है।



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