....तो पेट्रोल तीस रुपये तक घट जायेगा! डीजल, गैस के दाम भी गिरेंगे

पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाने की कवायद
कल और परसों चंडीगढ़ में होने जा रही काउंसिल की बैठक
नई दिल्ली, 27 जून। केंद्र सरकार आम लोगों को महंगाई से राहत देने के बारे में स्थायी विकल्प पर विचार कर रही है। कल और परसों होने जा रही जीएसटी काउंसिल की बैठक में बड़ा फैसला लेकर पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों पर बड़ी राहत दे सकती है। 
महंगाई को बढ़ाने में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों का बड़ा हाथ होता है। इनकी कीमतें बढ़ने से चीजें महंगी होती हैं। बीते दिनों केंद्र की मोदी सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर दो बार एक्साइज ड्यूटी घटाकर आम लोगों को राहत देने का काम किया था। 
यदि पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी में शामिल करने का फैसला ले लिया जाता है तो लोगों को गाड़ी में तेल भरवाने और रसोई में खाना बनाने के लिए सोचना नहीं पड़ेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष विवेक देबरॉय ने सरकार के इस कदम के संकेत दिए हैं। देबरॉय ने कल और परसों चंडीगढ़ में होने जा रही जीएसटी काउंसिल की बैठक से पहले कहा कि इस बैठक में पेट्रोलियम पदार्थों को जीएसटी के दायरे में लाने का काम हो सकता है। 
उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम पदार्थों को जीएसटी के दायरे में लाने से महंगाई को थामने का कारगर उपाय निकलेगा। अगर ऐसा हो गया, तो पेट्रोल की कीमत में करीब 30 रुपये की कमी हो जाएगी। 
हालांकि, राज्यों की ओर से इस कदम का जोरदार विरोध भी होने की तमाम गुंजाइश है। राज्य नहीं चाहते हैं कि पेट्रोलियम पदार्थों को जीएसटी के दायरे में लाया जाए। इसकी वजह ये है कि इस कदम से उनको करीब दो लाख करोड़ के राजस्व का नुकसान होगा। वर्ष 2020-21 में केंद्र और राज्य सरकारों को पेट्रोल और डीजल पर टैक्स से छह लाख करोड़ रुपये का राजस्व मिला था। फिलहाल पेट्रोलियम पदार्थों पर केंद्रीय टैक्स के अलावा राज्य अलग से वैट लगाते हैं। सबसे ज्यादा वैट राजस्थान, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश समेत कुछ राज्यों में है। भाजपा शासित राज्यों ने पेट्रोल-डीजल पर केंद्रीय करों की कटौती के बाद वैट में भी कटौती की थी।

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