मुस्लिम समाज के लोग भी मन्दिर के समर्थन में
थम नहीं रहा राजा मंडी रेलवे स्टेशन पर मन्दिर का विवाद
हिंदूवादी संगठन कर रहे मंदिर हटाने का कड़ा विरोध
आगरा, 29 अप्रैल। यहां राजा की मंडी रेलवे स्टेशन पर बने चामुंडा देवी मंदिर को हटाए जाने पर सियासत गरमाने लगी है। तमाम हिंदूवादी संगठन आगरा रेल मंडल के विरोध में खड़े हैं। आज मुस्लिम समाज के लोग भी आज मंदिर के समर्थन में सामने आ गए।
गौरतलब है कि इस स्टेशन के विस्तार में आ रही दिक्कतों के चलते मंडलीय रेल प्रबंधक ने मंदिर को शिफ्ट कर लेने का नोटिस दिया है। इसके अलावा आगरा छावनी रेलवे स्टेशन पर भी एक मजार को हटाने का नोटिस दिया गया है।
चामुंडा मंदिर को लेकर सियासत तेज है। इस मंदिर को रेलवे स्टेशन से भी पुराना बताकर इसे हटाने के निर्णय का विरोध किया जा रहा है। बजरंग दल के प्रांत सह संयोजक दिग्विजय नाथ तिवारी ने ऐलान कर दिया है कि रेलवे स्टेशन पर स्थित प्राचीन चामुंडा मंदिर की एक इंच भूमि को भी रेलवे ने लिया या फिर उस मंदिर पर रेलवे द्वारा एक भी खरोंच दी गई तो उसका अंजाम भुगतने के लिए आगरा रेल मंडल को तैयार रहना होगा। डीआरएम को उनकी कुर्सी से हिलाने और उतारने का काम विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल करेंगे।
आज सुबह भाजपा नेत्री शबाना खंडेलवाल के नेतृत्व में कुछ मुस्लिम समाज के लोग भी मंदिर के समर्थन में पहुंच गए। उन्होंने चामुंडा देवी मंदिर के दर्शन किये और मंदिर के पुजारी को अपना समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि वे मंदिर पर बुलडोजर नहीं चलने देंगे और जरूरत पड़ी तो बुलडोजर के आगे लेटकर मंदिर की रक्षा करेंगे।
विगत 10 अप्रैल को आगरा रेलवे मंडल ने एक नोटिस लगाया था कि रेलवे स्टेशन राजा की मंडी के प्लेटफार्म नंबर एक से मंदिर को हटा लिया जाए नहीं तो रेलवे प्राचीन चामुंडा मंदिर को हटाने का कार्य करेगा। उनका कहना था कि मन्दिर के कारण प्लेटफार्म पर बेहद कम जगह बची है और ट्रेनों के संचालन में दिक्कत आ रही है। आगरा रेल मंडल के प्रबंधक आनंद स्वरूप ने 25 अप्रैल को ट्वीट किया। इसमें उन्होंने कहा कि यदि मंदिर नहीं हटता है तो राजा मंडी रेलवे स्टेशन का बंद होना सुनिश्चित है।
इसके बाद ही चामुंडा देवी मंदिर को लेकर हिंदूवादी और रेलवे प्रशासन आमने-सामने आ गये। आज मुस्लिम समाज के लोगों ने भी अपना समर्थन दे दिया। दबाव की राजनीति को देखते हुए रेलवे और जिला प्रशासन बीच का रास्ता निकालने के प्रयासों में जुट गया है। बता दें कि करीब 20-22 साल पहले भी रेलवे ने इस मंदिर को हटाने की कवायद की थी। उस समय भी हिंदूवादी संगठनों के दबाव में मंदिर को हटाने का फैसला टालना पड़ा था।
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