चैम्बर: शलभ की राहें कितनी आसान, अगले दस दिन तय करेंगे
आगरा, 17 फरवरी। नेशनल चैम्बर ऑफ इंडस्ट्रीज एन्ड कॉमर्स यूपी की आगरा शाखा के वार्षिक चुनावों में अध्यक्ष पद के दावेदार के रूप में सामने आए शलभ शर्मा की राहें कितनी आसान होंगी, यह आने वाले दस-ग्यारह दिनों में स्पष्ट हो जायेगा। अभी जहाँ शलभ आश्वस्त नजर आ रहे हैं, वहीं कुछ लोग उनके खिलाफ प्रतिद्वंद्वी खड़ा करने के प्रयासों में जुटे हुए हैं।
चैम्बर में अध्यक्ष पद की दावेदारी करने के लिए करीब एक दर्जन सदस्य योग्यता रखते हैं। इनमें बब्बू साहनी, अवनीश कौशल, अनूप गोयल, राजेश अग्रवाल, राजेश गोयल, संजय गोयल, गिरीश गोयल, मुरारीलाल गोयल आदि शामिल हैं। सवाल यह है कि क्या इनमें से कोई इस बार अध्यक्ष पद की दावेदारी करेगा?
हालांकि कहा जा रहा है कि इनमें से अधिकांश ने शलभ को उनके खिलाफ नामांकन नहीं करने का वायदा कर दिया है। चुनावों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कुछ पूर्व अध्यक्षों का समर्थन भी शलभ को मिल चुका है। इस सबके बावजूद चुनौती मिलने की सम्भावना खत्म नहीं मानी जा सकती है।
दरअसल, चैम्बर के एक गुट को अध्यक्ष पद पर शलभ का सामने आना कम रास आ रहा है। वे उनका प्रतिद्वंद्वी खड़ा करने के प्रयासों में जुट गए हैं। यदि उनके प्रयासों ने गति पकड़ी तो यह प्रतिद्वंद्वी नये योग्य लोगों के अलावा पूर्व अध्यक्षों में से भी हो सकता है।
ऐसा माना जाता है कि हाल के कुछ वर्षों में नए सदस्यों का चैम्बर की गतिविधियों के प्रति मोह कम हुआ है। दो साल से कोरोना महामारी के कारण भी चैम्बर की सक्रियता कम हुई। नये दावेदारों की कमजोर इच्छाशक्ति के मद्देनजर पिछले साल कुछ पूर्व अध्यक्षों के बीच तय हुआ कि नए दावेदारों के न आने की स्थिति में तीन-चार पूर्व अध्यक्षों को एक-एक साल के लिये पुनः अध्यक्ष बनाया जाये। पिछले साल किसी के सामने न आने पर मनीष अग्रवाल को अध्यक्ष चुन लिया गया।
इस साल भी पूर्व अध्यक्षों में से किसी एक को आगे लाकर नामांकन भरवाने की तैयारी थी। लेकिन उससे पहले शलभ शर्मा की दावेदारी सामने आ गई। उनका समर्थन कर रहे लोगों ने याद दिलाना शुरू कर दिया कि तय यह हुआ था कि नये दावेदार के सामने आने पर पूर्व अध्यक्ष दावा नहीं करेंगे। कुछ पूर्व अध्यक्षों को इसमें राजनीति नजर आने लगी है। उन्हें लग रहा है कि उनको रोकने के लिए शलभ को आगे लाया गया है। सूत्रों का कहना है कि इससे नाराज लोगों ने अंदरखाने में अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। रणनीति में सहयोग के लिये कुछ लोग चुनाव संचालन समिति में शामिल नहीं हुए। उन्होंने अन्य दावेदारों को पर्चा भरने के लिए प्रेरित करना शुरू कर दिया है, साथ ही स्वयं भी चुनाव मैदान में आने की सम्भावनायें तलाशना शुरू कर दी हैं।
नामांकन की प्रक्रिया 21 से 28 फरवरी तक चलेगी। इस दौरान ही तय हो पायेगा कि अध्यक्ष पद पर कोई अन्य नामांकन दाखिल होगा या नहीं। कोई दूसरा नामांकन नहीं आने पर ही शलभ शर्मा की राह निष्कंटक हो पायेगी।
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