बागियों को थामना भाजपा प्रत्याशियों के लिये पहली चुनौती

समय रहते सम्भल गये पुरुषोत्तम
क्षेत्र में सक्रियता काम आई योगेंद्र के
कड़ी मेहनत करनी होगी बेबी रानी को
इस बार थोड़ी दुर्गम होगी धर्मेश की राह


आगरा, 15 जनवरी। भारतीय जनता पार्टी ने आगरा की नौ विधानसभा सीटों पर शनिवार को घोषित प्रत्याशियों के सहारे जीत की संभावनाओं को बनाए रखने की कोशिश की है। पार्टी ने पिछला चुनाव जीत चुके पाँच विधायकों के टिकट काट कर नए प्रत्याशी उतारे हैं। ये पांचों विधायक पार्टी द्वारा कराए गए आंतरिक सर्वे में अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतरे। इनके स्थान पर अधिक मजबूत छवि वाले प्रत्याशियों को लाकर पार्टी ने अपने किले को बचाये रखने की जुगत की है। 
देखना यह होगा कि भाजपा की यह रणनीति कितनी सफल हो पाती है।
कुछ सीटों पर तो प्रत्याशियों का अभी से खुलकर विरोध होने लगा है। कुछ विधायक व अन्य दावेदार बागी तेवर दिखा रहे हैं। एत्मादपुर के विधायक रामप्रताप सिंह की गहरी नाराजगी की खबरें पूरे जिले में फैली हुई हैं। आगरा ग्रामीण सीट की विधायक हेमलता दिवाकर ने भी बागी तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। फतेहपुर सीकरी से विधायक व प्रदेश सरकार के मंत्री चौ. उदयभान सिंह खामोश जरूर दिखाई दे रहे हैं, लेकिन उनके समर्थकों में भारी अकुलाहट नजर आ रही है। फतेहपुर सीकरी से एक अन्य दावेदार जितेंद्र फौजदार ने तो निर्दलीय चुनाव लड़ने के संकेत भी दे दिए हैं।
फतेहाबाद से टिकट पाने वाले पूर्व विधायक छोटे लाल वर्मा का भी पार्टी में ही विरोध है। उन्हें चुनाव प्रचार के साथ विरोधियों को शांत करने के मोर्चे पर भी काम करना होगा। खेरागढ़ में भगवान सिंह कुशवाह के रूप में पार्टी ने अनुभवी चेहरे को आगे किया है। हालांकि इस सीट से भी भाजपा में कई दावेदार थे और अब वे निर्दलीय लड़ने की ताल ठोक रहे हैं। इन हालात में देखना होगा कि पार्टी की साख और कुशवाह की व्यक्तिगत छवि दोनों के सहारे नैया पार हो पाती है कि नहीं।
बाह में भदावर घराने के वर्चस्व को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने पक्षालिका सिंह को ही पुनः टिकट देने मुनासिब समझा। उनके सामने सपा प्रत्याशी चुनौती पेश कर सकते हैं। हालांकि क्षेत्रीय जानकार मानते हैं कि यहाँ भाजपा की संभावनाएं ठीक-ठाक हैं।
एत्मादपुर सीट की बात करें यहां डॉ धर्मपाल को क्षेत्रीय जनता पर अपनी पकड़ का लाभ मिल सकता है। उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती भाजपा में स्वयं को लेकर उपजे विरोध को शांत करना है।

समय रहते सम्भल गये पुरुषोत्तम

आगरा उत्तर सीट पर संगठन में पकड़ बनाये रखने का लाभ पुरुषोत्तम खंडेलवाल को जरूर मिला है, लेकिन उनको पुनः टिकट दिए जाने का विरोध अग्रवाल समाज के चंद नेता कर रहे हैं। विरोधियों में बहुत से ऐसे हैं, जो खुद टिकट के दावेदार थे और कुछ ऐसे भी जो पर्दे के पीछे रहकर इस विरोध को निरंतर हवा दे रहे हैं। हालांकि अब टिकट की आधिकारिक घोषणा हो जाने के बाद समझदार दावेदारों ने पांव पीछे खींचने शुरू कर दिए हैं। माना जा रहा है कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के समझाने पर अन्य लोग भी शीघ्र विरोध की आवाज उठाना बन्द कर देंगे। विधायक रहते हुए पुरुषोत्तम का नाम कभी जमीन के घोटालेबाजों से जुड़ा तो कभी क्षेत्र में विकास कार्य न कराने के आरोप लगे। लेकिन पुरुषोत्तम वक्त रहते हुए सम्भलने में सफल रहे। उन्होंने न केवल विवादित लोगों से दूरी बनाई, बल्कि अपने क्षेत्र में सक्रियता भी बढ़ा दी। इससे वे अपने बारे में नेगेटिव फीडबैक को रोकने में सफल रहे।

क्षेत्र में सक्रियता काम आई योगेंद्र के

आगरा दक्षिण की बात करें तो यहां भी विधायक योगेंद्र उपाध्याय का नाम जमीन के घोटालेबाजों के साथ खूब उछला। कुछ लोगों ने अंतिम समय तक इस मुद्दे को हवा देने की कोशिशें कीं। लेकिन अनुभवी योगेंद्र उपाध्याय ने न केवल संगठन के वरिष्ठ नेताओं से नजदीकियां बनाये रखीं बल्कि अपने निर्वाचन क्षेत्र में प्रतिदिन की सक्रियता बढ़ा दी। इसका लाभ यह हुआ कि राजनीतिक प्रतिद्वन्द्विता रखने वालों को छोड़कर कर सामान्य जन में उनकी छवि ठीक बनी रही। हालांकि प्रतिद्वंद्वियों ने उनकी सीट पर कई दावेदार खड़े करने की कोशिशें की। एक अधिकारी की पत्नी को भी समाजसेवी बताते हुए पार्टी में शामिल कराया गया और उन्हें टिकट का दावेदार भी कहा जाने लगा। इस महिला ने लखनऊ व दिल्ली में पार्टी पदाधिकारियों तक खूब दौड़ लगाई। लेकिन पार्टी ने किसी नये दावेदार की जगह योगेंद्र को ही एक बार फिर चुनाव में उतारना बेहतर समझा।

कड़ी मेहनत करनी होगी बेबी रानी को

आगरा ग्रामीण सीट पर टिकट पाने वाली भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बेबीरानी मौर्य को चुनाव जीतने के लिये कड़ी मेहनत करनी होगी। वर्तमान विधायक हेमलता दिवाकर को लेकर इस क्षेत्र के लोगों की बड़ी शिकायतें रहीं। मतदाताओं का आरोप है कि अधिकांश इलाकों में हेमलता ने पांच साल में कभी मुड़ कर नहीं देखा। कुछ क्षेत्रों में तो उनकी गुमशुदगी के पोस्टर तक लग गए थे। जनता की नाराजगी के फीडबैक से ही उन्हें पुनः टिकट नहीं मिल पाई। अब बेबीरानी को क्षेत्रीय जनता को यह भरोसा दिलाना होगा कि वह जनसमस्याओं को दूर कराने व विकास कार्यों के लिए हमेशा उपलब्ध रहेंगी। कुछ लोगों को शिकायत है कि बेबी रानी पूर्व में राज्यपाल रह चुकी हैं, अतः उनके व्यवहार में परिवर्तन दिखाई दे सकता है। बेबीरानी के समक्ष इस मिथक को तोड़ना बड़ी चुनौती होगा और उन्हें जनता के साथ सहज भाव अपनाना होगा।

इस बार थोड़ी दुर्गम होगी धर्मेश की राह

आगरा छावनी सीट से टिकट पाने वाले प्रदेश सरकार के मंत्री डॉ. जीएस धर्मेश की राह इस बार के चुनावों में आसान नहीं रहने वाली है। छावनी के कई क्षेत्रों में लोग उनसे नाराज हैं। लोगों को अपनी समस्याएं दूर न होने की शिकायत सबसे अधिक है। हालांकि धर्मेश ने अपनी इस छवि से बाहर निकलने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। पिछले दिनों सदर बाजार के व्यापारियों के हित में उठाये गए कदमों से उनकी छवि में काफी सुधार हुआ है। धर्मेश को इस बार प्रतिद्वंद्वी पार्टियों से भी कड़ी टक्कर मिलने की संभावना है। ऐसे में उन्हें अपनी सीट बचाये रखने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी।

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