आखिर कौन समझेगा ट्रांसजेंडरों का दर्द !
फैशन शो में भाग लेते ट्रांसजेंडर |
आगरा। खुशियों के अवसर पर आपने अक्सर ट्रांसजेंडरों को बधाई गायन करते देखा होगा। कई बार रेलगाड़ियों में या फिर सड़कों, चौराहों पर भी इन्हें लोगों से बख्शीश की मांग करते देखा होगा। इन नाचते-गाते ट्रांसजेंडरों (किन्नरों) का अपना कोई दर्द भी होता है, कम ही लोग इससे वाकिफ हैं।
आगरा में बृहस्पतिवार को एक अनूठे कार्यक्रम में शिरकत करने आये ट्रांसजेंडरों ने मीडिया के समक्ष अपना दर्द भी बयान किया।
दिल्ली से आई ट्रांसजेंडर 'कहर' ने कहा कि समाज कितनी भी तरक्की कर ले लेकिन ट्रांसजेंडरों के प्रति नजरिया अभी भी नहीं बदला है। उन्हें हर रोज दौरान लोगों की गंदी निगाहों का सामना करना पड़ता है। कहर ने कहा, "समाज को बदलने की जरूरत है, हम भी इंसान हैं, हमें भी इज्जत के साथ जीने का हक है। जीने के लिए और वित्तीय रूप से मजबूत होने के लिए नौकरी की जरूरत है, लेकिन ट्रांसजेंडरों को नौकरी नहीं मिलती। आखिर वह अपना जीवन कैसे यापन करें। मजबूरन उन्हें गलत कामों की ओर मुड़ना पड़ता है।"
ओडिशा से आईं किन्नर अलीना दास ने कहा कि सरकार की ओर से हमें मुख्यधारा में शामिल करने का प्रयास अभी धरातल पर नहीं दिखाई दे रहा है। अलीना ने कहा, "हमें वे सभी अधिकार दिए जाने चाहिए, जो अहसास कराएं कि हम भी समाज का मजबूत अंग हैं।"
देश के विभिन्न शहरों से यहां आए करीब बीस से अधिक किन्नरों ने विशेष रूप से उनके व दिव्यांगों के लिए आयोजित फैशन शो में कैटवॉक किया।
इसके बाद किन्नर शिवानी ने एक मां की गोद में लेटे दस महीने के बच्चे के सिर पर हाथ फेरकर उसे आशीर्वाद दिया तो मां भी भावुक हो उठी।
यह आयोजन सामाजिक संस्था रिवाज़ द्वारा किन्नरों और दिव्यांगों के सशक्तिकरण के लिए किया गया। ट्रांसजेंडर इंडो-वेस्टर्न परिधानों को पहनकर जब रैंप पर उतरे, तो उनके चेहरों पर ख़ुशी की चमक ही दिखाई दे रही थी। ट्रांसजेंडरों को लग रहा था कि वे भी समाज की मुख्य धारा का हिस्सा हैं।
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